रविवार 12 जुलाई 2026 - 14:31
 इराक़ और ईरान दो शरीर एक आत्मा हैं, यह संबंध दिन-प्रतिदिन और अधिक मजबूत तथा स्थायी होना चाहिए

शहीद रहबर के पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा के सिलसिले में इराक़ के दौरे पर गए आयतुल्लाह जवाद मरवी ने नजफ़ अशरफ़ में क़ुम और नजफ़ के उलेमा की संयुक्त सभा को संबोधित करते हुए कहा कि क़ुम से आए उलेमा, शिक्षक और मरजा-ए-तक़लीद के प्रतिनिधि, क़ुम के मरजा-ए-तक़लीद का सलाम और शुभकामनाएँ इराक़ के उलेमा, विचारकों, युवाओं और जनता तक पहुँचाने के लिए नजफ़ आए हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार,  शहीद रहबर के पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा के सिलसिले में इराक़ के दौरे पर गए आयतुल्लाह जवाद मरवी ने नजफ़ अशरफ़ में क़ुम और नजफ़ के उलेमा की संयुक्त सभा को संबोधित करते हुए कहा कि क़ुम से आए उलेमा, शिक्षक और मरजा-ए-तक़लीद के प्रतिनिधि, क़ुम के मरजा-ए-तक़लीद का सलाम और शुभकामनाएँ इराक़ के उलेमा, विचारकों, युवाओं और जनता तक पहुँचाने के लिए नजफ़ आए हैं।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा दोनों धार्मिक शिक्षाकेंद्रों (हौज़ों) तथा ईरान और इराक़ के बीच भाईचारे, ईमान और एकता के गहरे संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने इराक़ की जनता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शहीद नेता हमेशा इराक़ को एक महान, सम्मानित और सभ्य राष्ट्र कहा करते थे।

आयतुल्लाह मरवी ने कहा कि शहीद नेता ने अपना पूरा जीवन इमाम हुसैन (अ) के मार्ग पर दृढ़ता के साथ बिताया और अपनी जान, धन तथा परिवार को इस्लाम और अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) के रास्ते में समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि शहीद नेता हमेशा अरबईन के दौरान इराक़ी जनता की मेहमाननवाज़ी का उल्लेख करते थे, और आज इराक़ के उलेमा, युवा और आम लोग उनके स्वागत तथा सम्मान के लिए एकजुट दिखाई दे रहे हैं।

आयतुल्लाह मरवी ने कहा कि शहीद नेता की भव्य अंतिम यात्रा केवल एक महान व्यक्तित्व को विदाई देना नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि ईरान और इराक़ की जनता दो शरीर और एक आत्मा के समान है, जिन्हें ईमान, अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) से प्रेम और इमाम हुसैन की विचारधारा ने एकजुट कर रखा है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों भाई देशों के बीच यह संबंध दिन-प्रतिदिन और अधिक मजबूत तथा स्थायी होना चाहिए। साथ ही उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला ईरान और इराक़ के दुश्मनों को असफल करे, दोनों देशों की जनता को और अधिक एकजुट बनाए तथा अत्याचारी ज़ायोनी आक्रमण का अंत करे।

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